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Archive for the ‘ख्वाब’ Category

जितना जाना जिंदगी को,

बस इतना ही जाना है जाना……

कुछ भी नहीं है जानने को,

बस वो पाया जिसने जो माना….

सारे पोथे, सारी बातें,

मन को बहलाने का खेला….

जिसका मन बहले है जिस से,

वो समझे उसने वो जाना……

बातों से ही तो बनी है दुनिया,

बातें तेरी मेरी और सबकी…….

बातों की मोहब्बत, झगडे बातों के,

सच में तो सबको है जाना…..

मानो तो जादू का पिटारा,

या मानो जंगल वीरान……

जिसने जो माना वो दुनिया उसकी,

सच तो फिर भी कोई न जाना…..

– गौरव संगतानी

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Jitna jana jindagi ko,

Bas itna hi jana hai jana….

Kuch bhi nahi hai janane ko,

bas wo paya jisne jo mana…..

Saare pothe, saari baate,

Man to behlane ka khela….

Jiska man behle hai jis se,

Wo samjhe usne wo jana….

Baato se hi to bani hai duniya,

Baate teri, meri aur sabki….

Baato ki mohabbat, jhagde baato ke,

Sach me to sabko hai jaana…..

Maano to jaadu ka pitara,

Ya maano jangal viraan…..

Jisne jo mana wo duniya uski,

sach to fir bhi koi na jaana…..

– Gaurav Sangtani

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क्यूँ मसरूफ रहें हर वक्त, चंद लम्हें फुर्सत के भी बिताएं जाएँ |
क्यूँ हर रिश्ते का नाम हो, एक मोहब्बत बेनाम भी निभाई जाये ||
तेरा नाम न आ जाये जुबान पे, ये कहानी दिल में ही छुपाई जाये |
खुली आँखों से देखें हैं ख्वाब तेरे, एक रात जग के भी बितायी जाये ||

– गौरव संगतानी

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सोचा नहीं कभी हमने,
क्यूँ दिल तुमबिन परेशां है |
क्यूँ सांसे उखड़ी उखड़ी हैं,
आँखें क्यूँ हैरान हैं ||

सोचा नहीं कभी हमने,
क्या रिश्ता ये अनजाना सा |
क्या डोर बांधें है हमको,
क्यूँ लगता सब अफसाना सा ||

सोचा नहीं कभी हमने,
क्या होगा जब तुम जाओगे |
खुद को ही खो देंगे हम,
तेरी यादों में ही खोएंगे ||

– गौरव संगतानी

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हत्थां दा लिख्या लक्ख मिटाए कोई,
हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा…..
लक्ख करें जतन तू जट्टा,
किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा….

लोकी पराये हो गए,
ते हुए अपने बेगाने…
किस्मत दा ए रोला सारा,
ऎंवे कोई नहीं बदलदा….
हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा…..
किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा….

– गौरव संगतानी

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खुद में उलझ के रह गयी, ये जिंदगी की दास्ताँ..
कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं, न संग कोई कारवां….

– गौरव संगतानी

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आज बिछड़े हैं कल का डर भी नहीं
जिंदगी इतनी मुख्तसर भी नहीं

ज़ख़्म दिखते नहीं अभी लेकिन
ठंडे होगे तो दर्द निकलेगा
तैश उतरेगा वक्त का जब भी
चेहरा अंदर से ज़र्द निकलेगा

आज बिछड़े हैं…

कहने वालों का कुछ नहीं जाता
सहने वाले कमाल करते हैं
कौन ढूंढे जवाब दर्दों के
लोग तो बस सवाल करते हैं

आज बिछड़े हैं ..

कल जो आयेगा, जाने क्या होगा
बीत जाये जो कल नहीं आते
वक्त की शाख तोड़ने वालों
टूटी शाखों पे फल नहीं आते

आज बिछड़े हैं ..

कच्ची मिट्टी है, दिल भी इंसा भी
देखने ही में सख्त लगता है
आंसू पोंछे तो आंसुओं के निशां
खुश्क़ होने मे वक़्त लगता है

आज बिछड़े हैं कल का डर भी नहीं
जिंदगी इतनी मुख्तसर भी नहीं

– गुलज़ार

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भीनी भीनी सी खुशबु तेरी,
महका महका सा एहसास है… |
एक अरसा हुआ तुझको देखे हुए…
पर तू हर लम्हा मेरे पास है…. ||

– गौरव संगतानी

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