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Archive for February, 2010

सोचा नहीं कभी हमने,
क्यूँ दिल तुमबिन परेशां है |
क्यूँ सांसे उखड़ी उखड़ी हैं,
आँखें क्यूँ हैरान हैं ||

सोचा नहीं कभी हमने,
क्या रिश्ता ये अनजाना सा |
क्या डोर बांधें है हमको,
क्यूँ लगता सब अफसाना सा ||

सोचा नहीं कभी हमने,
क्या होगा जब तुम जाओगे |
खुद को ही खो देंगे हम,
तेरी यादों में ही खोएंगे ||

– गौरव संगतानी

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