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Archive for April, 2009

जिंदगी यूँ चली, होके खुद से खफ़ा |
पाके भी खो दिया, हमने सब हर दफ़ा ||
कोई साथी नहीं, कोई संग ना चला |
दर्द की रह में, हँसी हुई बेवफा ||

– गौरव संगतानी

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