Feeds:
Posts
Comments

Archive for November, 2008

कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..???

 

कुछ बातों का कोई कारण नही होता

कोई अर्थ नहीं होता

कोई तर्क नहीं होता

आप स्वीकारें न स्वीकारें….

कोई फर्क नही होता….!!!

 

कुछ सवालों का कोई जवाब नही होता

कोई शुरुआत नही होती

कोई अंत नहीं होता

आप कितना ही पूछें…

कोई हल नहीं होता….!!!

 

कुछ रास्तों की कोई मंजिल नहीं होती

कोई आसरा नही होता

कोई ठिकाना नहीं होता

आप कितना ही चलतें रहें….

कोई साथी कोई सहारा नहीं होता…..!!!

 

और कुछ ज़ज्बातों के लिए लफ्ज़ नहीं होते….. बस कुछ नहीं होता…!!!

 

– गौरव संगतानी

Read Full Post »