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Archive for May, 2008

आज अश्कों का तार टूट गया
रिश्ता-ए-इंतज़ार टूट गया

यूँ वो ठुकरा के चल दिए गोया
इक खिलौना था प्यार टूट गया

रोए रह-रह कर हिचकियाँ लेकर
साज़-ए-गम बार बार टूट गया

‘सैफ’ क्या चार दिन कि रंजिश से
इतनी मुद्दत का प्यार टूट गया

– सैफुद्दीन सैफ

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खुदाई

खुदा हम को ऐसी खुदाई ना दे
कि अपने सिवा कुछ दिखाई ना दे

ख़तावार समझेगी दुनिया तुझे
अब इतनी भी ज़्यादा सफाई ना दे

– बशीर बद्र

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राज़

पास आकर भी फ़ासले क्यों हैं |
राज़ क्या है, समझ मे ये आया ||
उस को भी याद है कोई अब तक |
मैं भी तुमको भुला नही पाया ||

– जावेद अख़्तर

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बस इक झिझक है यही हालदिल सुनाने में 
कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फसाने में 

इसी में इश्क़ की क़िस्मत बदल भी सकती थी 
जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में 

कैफ़ी आज़मी

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