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Archive for March, 2008

रात तब नहीं होती जब अंधेरा  जाता है
रात तब होती है जब उज़ाला चला जाता है……
बात बहुत मामूली है…..इसिलिये तो खास है…..!

दर्द तब नहीं होता जब कोई भुला देता है,
दर्द तब होता है जब वो याद बहुत आता है……..
बात बहुत मामूली है…..इसिलिये तो खास है…..!

मैं तब नहीं थकता जब बहुत चल लेता हूँ,
मैं बहुत थक जाता हूँ जब खुद को अकेला पाता हूँ
बात बहुत मामूली है…..इसिलिये तो खास है…..!


ज़ुल्म तब नहीं बढ़ता जब लोग बुरे हो जाते हैं,
ज़ुल्म तब बढ़ जाता है जब अच्छे लोग सो जाते हैं….
बात बहुत मामूली है…..इसिलिये तो खास है…..!

गौरव संगतानी

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नज़्म उलझी हुई है सीने में, मिसरे अटके हुए हैं होठों पर
उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह, लफ्ज़ कागज पे बैठते ही नहीं
कब से बैठा हुआ मैं जानम, सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा

बस तेरा नाम ही मुकम्मल है, इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी………..!

गुलज़ार

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हमें अश्कों से ज़ख़्मों को धोना नही आता |

मिलती है खुशी तो उसे खोना नही आता ||

सह लेते हैं हर गम हस के ,

और वो कहते हैं कि हमें रोना नही आता…||

अग्यात

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