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Archive for October, 2007

जो होना है वो होता है,
तेरी मेरी बिसात कुछ भी नहीं.
मैं जो यूँ अक्सर उदास रहता हूँ,
बात इतनी सी है कि……… बात कुछ भी नहीं.

अज्ञात


(कहीं सुना था कभी)

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जिंदगी हर पल बस यही सिखाती है,
चलने का नाम ही जिंदगानी है |
जो थम गया तो मिट गया,
दरिया सिर्फ बहता पानी है ||

– गौरव संगतानी

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उंचाई

हे प्रभु…!
मुझे इतनी उंचाई कभी मत देना
गैरों को गले से लगा ना सकूँ
इतनी रुखाई कभी मत देना

– अटल बिहारी वाजपेयी

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एक क्षणिका….!

जाते हुए दिन ने शाम से बस इतना ही कहा
‘अब भी उदास बैठा है वो,
न जाने किस गम को दबाए बैठा है वो |

उगते हुए सूरज की किरणें,
पँछियों की चहचहाहट,
खिलते हुए फूल,
सुबह की चाय की चुस्की,
स्कूल जाते बच्चों का शोर,
धान कूटती औरतों की गप्पें,
तंदूर से आती मकई की रोटी की महक,
शाम की चाय मठरी के साथ,
सब बर्बाद…!
अब भी उदास बैठा है वो,
न जाने किस गम को दबाए बैठा है वो |’
जाते हुए दिन ने शाम से बस इतना ही कहा

– गौरव संगतानी

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कभी यूँ ही लिखा था कुछ तेरी याद मे, तेरी याद आयी तो फिर से गुनगुना दिया आज….

“दर्द की इंतहाँ हो गयी है यारों |
सुबह चले थे अब शाम हो गयी है यारों |
थक गयें हैं लेकिन कोई सहारा नहीं मिलता |
समंदर में मौजों को किनारा नहीं मिलता |
टूटा तो बहुत कुछ इस आसमां की झोली से |
इन पत्थरों में लेकिन कोई सितारा नहीं मिलता…”

बस यूँ ही….

– गौरव संगतानी

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तुझे नहीं मैं खुद को ढूँढता हूँ |
उजालो से डर लगता है, अंधेरों को ढूँढता हूँ |
ढूँढता हूँ उस शख्स को, जिसे तूने कभी चाहा था |
अपने वादे न निभा पाया, उस गुनाहगार को ढूँढता हूँ |

तुझे नहीं मैं खुद को ढूँढता हूँ |
उजालो से डर लगता है, अंधेरों को ढूँढता हूँ |

ढूँढता हूँ उन लम्हों को, जब करीब थे हम दोनो |
ढूँढता हूँ उन लब्जोँ को, जिन्हे उम्मीद थी मुझमें |
जिन पर साथ चले थे, उन राहों को ढूँढता हूँ |
बाँटी थी जो बातेँ, उन बातों को ढूँढता हूँ |

तुझे नहीं मैं खुद को ढूँढता हूँ |
उजालो से डर लगता है, अंधेरों को ढूँढता हूँ |
– गौरव संगतानी

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ये कैसी है तेरे इश्क की जादूगरी,
अभी तू यहीँ है और नहीं अभी |
अभी तुझसे मिलकर हँसे थे हम,
अभी तुझे खोकर रो दिये भी |

तू ही तन्हाइयोँ में साथ मेरे,
तू ही भीङ में करे तन्हा |
तू ही तो ख्वाबोँ में है मेरे,
तू ही रातों को जगाये भी |

ये कैसी है तेरे इश्क की जादूगरी,
अभी तू यहीँ है और नहीं अभी |

– गौरव संगतानी

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