खुद में उलझ के रह गयी, ये जिंदगी की दास्ताँ..
कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं, न संग कोई कारवां….
- गौरव संगतानी
November 26, 2009 by Gaurav Sangtani
खुद में उलझ के रह गयी, ये जिंदगी की दास्ताँ..
कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं, न संग कोई कारवां….
- गौरव संगतानी
बेहतरीन!!
बेहतर…