हत्थां दा लिख्या लक्ख मिटाए कोई, हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा….. लक्ख करें जतन तू जट्टा, किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा…. लोकी पराये हो गए, ते हुए अपने बेगाने… किस्मत दा ए रोला सारा, ऎंवे कोई नहीं बदलदा…. हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा….. किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा…. – गौरव संगतानी
Archive for November, 2009
हत्थां ते लिखा नहीं मिटदा…..
Posted in ख्वाब on November 27, 2009 | 4 Comments »
जिंदगी की दास्ताँ
Posted in ख्वाब on November 26, 2009 | 2 Comments »
खुद में उलझ के रह गयी, ये जिंदगी की दास्ताँ.. कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं, न संग कोई कारवां…. – गौरव संगतानी











