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Archive for November, 2009

हत्थां दा लिख्या लक्ख मिटाए कोई, हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा….. लक्ख करें जतन तू जट्टा, किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा…. लोकी पराये हो गए, ते हुए अपने बेगाने… किस्मत दा ए रोला सारा, ऎंवे कोई नहीं बदलदा…. हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा….. किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा…. – गौरव संगतानी

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खुद में उलझ के रह गयी, ये जिंदगी की दास्ताँ.. कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं, न संग कोई कारवां…. – गौरव संगतानी

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