जाने किसके के शेर है….. पर अच्छे लगे सो बाँट रहा हूँ…….
कितना खुश्फहम कोई इंसान हो सकता है…
कभी तन्हाई में, आईना उठा के देखो…..
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दबा के कब्र मे, सब चल दिए ! दुआ, ना सलाम !
ज़रा सी देर मे, क्या हो गया जमाने को !
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दिल कि रग रग निचोड़ लेता है
इश्क़ मैं ये बड़ी मुसीबत है…..
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इक तुम्हारे रूठ जाने से
किसी को कुछ नहीं होता
फूल भी महकते हैं
रंग भी दमकते हैं
सूरज भी निकलता है
तारे भी चमकते हैं
लेकिन इतना ज़रूर होता है
इक तुम्हारे रूठ जाने से
कोई हँसना भूल जाता है …!!
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हम नींद के शोक़ीन ज़्यादा नही लेकिन,
कुछ खवाब ना देखें तो गुज़ारा नही होता…….
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यूँ तो पत्थर क़ी भी तक़दीर बदल सकती है
शर्त यह है क़ी उसे दिल से तराशा जाए
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शेष फिर कभी…..
सुनना चाहें यदि तो…. क्लिक करें:
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Archive for August, 2008
शेर
Posted in ख्वाब on August 20, 2008 | 8 Comments »
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं….
Posted in ख्वाब, मेरी आवाज़ on August 17, 2008 | Leave a Comment »
आइए सुने एक नज़्म जो ना जाने किसने लिखी है… पर बहुत कुछ कहती है..
http://gauravsangtani.podomatic.com/enclosure/2008-08-17T12_38_15-07_00.mp3











