राह आसान हो गई होगी जान पहचान हो गई होगी फिर पलट कर निगाह नहीं आई तुझ पे क़ुरबाँ हो गई होगी तेरी ज़ुल्फो को छेडती थी सबा खुद परेशाँ हो गई होगी उन से भी छीन लोगे याद अपनी जिन का ईमान हो गई होगी मरने वालो पे ’सैफ‘ हैरत क्यों मौत आसान हो गई होगी - सैफुद्दीन सैफ
Archive for July, 2008
राह आसान हो गई होगी
Posted in ख्वाब on July 29, 2008 | 2 Comments »
बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है…!
Posted in ख्वाब, dreams on July 3, 2008 | 2 Comments »
बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है दीवाने भी कहते हैं की दीवाना हुआ है रिश्ता था तभी तो किसी बेदर्द ने तोड़ा अपना था तभी तो कोई बेगाना हुआ है बादल की तरह आ के बरस जाये इक दिन दिल आप के होते हुए विराना हुआ है बजते हैं ख़यालों में तेरी याद के घुँगरू कुछ दिन से मेरा घर भी परीखाना हुआ है मौसम ने बनाया है निगाहों को शराबी जिस फूल को देखूं वही पैमाना हुआ है – अज्ञात











