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Archive for July, 2008

राह आसान हो गई होगी  जान पहचान हो गई होगी  फिर पलट कर निगाह नहीं आई  तुझ पे क़ुरबाँ हो गई होगी  तेरी ज़ुल्फो को छेडती थी सबा  खुद परेशाँ हो गई होगी  उन से भी छीन लोगे याद अपनी  जिन का ईमान हो गई होगी  मरने वालो पे ’सैफ‘ हैरत क्यों  मौत आसान हो गई होगी  - सैफुद्दीन सैफ 

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बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है  दीवाने भी कहते हैं की दीवाना हुआ है  रिश्ता था तभी तो किसी बेदर्द ने तोड़ा अपना था तभी तो कोई बेगाना हुआ है  बादल की तरह आ के बरस जाये इक दिन दिल आप के होते हुए विराना हुआ है  बजते हैं ख़यालों में तेरी याद के घुँगरू कुछ दिन से मेरा घर भी परीखाना हुआ है मौसम ने बनाया है निगाहों को शराबी जिस फूल को देखूं वही पैमाना हुआ है – अज्ञात 

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