गीले काग़ज़ क़ी तरह है ज़िंदगी अपनी,
कोई जलाता भी नहीं और कोई बुझाता भी नहीं |
इस कदर अकेले हो गये हैं आज कल,
कोई सताता भी नहीं और कोई मनाता भी नहीं ||
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आँखो मे महफूज़ रखना सितारों को,
राह मे कहीं ना कहीं रात होगी |
मुसाफिर तुम भी हो, मुसाफिर हम ही हैं,
किसी ना किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी ||
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पलकों के किनारे भिगोए ही नहीं,
वो सोचते हैं कि हम रोए ही नहीं |
वो पूछते हैं ख्वाबों मे किसे देखते हो,
और एक हम हैं कि एक उम्र से सोए ही नहीं ||
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दिल जीत ले वो जिगर हम भी रखते हैं,
कत्ल कर दे वो नज़र हम भी रखते हैं |
वादा किया है किसी को मुस्कराने का,
वरना आँखों मे समंदर हम भी रहते हैं ||
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परिंदों को मिलेंगी मंज़िलें,
ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं |
वही लोग रहते हैं खामोश अक्सर,
ज़माने मे जिनके हुनर बोलते हैं ||
कुछ प्यारे एस. एम. एस (लघु संदेश सेवा)
June 16, 2008 by Gaurav Sangtani












एस एम एस में तो सभी शायरों के शेर उठा उठा कर भेजे जा रहे हैं. आपने अच्छा कार्य किया है उनको कलेक्ट करने का. लगे रहिये.
Never ever reject any girls in your life..!
Because,
A good girls gives you happiness.
and
Bad girls gives you experience!
आदत और अदा में क्या फर्क है?
“रोड के नल से पानी पीना
गरीब पीये तो आदत,
अमीर पिये तो अदा,
अब एस एम एस को ले लो,
आप भेजो तो अदा
मैं भेजूं तो आदत