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Archive for June 1st, 2008

हम को तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया
रोने वाले तुझे किस बात पे रोना आया
कैसे मर-मर के गुज़ारी है तुम्हें क्या मालूम
रात भर तारों भरी रात पे रोना आया
कितने बेताब थे रिम झिम में पिएँगे लेकिन
आई बरसात तो बरसात पे रोना आया
कौन रोता है किसी और के गम कि खातिर
सब को [...]

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