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Archive for May 31st, 2008

आज अश्कों का तार टूट गया
रिश्ता-ए-इंतज़ार टूट गया
यूँ वो ठुकरा के चल दिए गोया
इक खिलौना था प्यार टूट गया
रोए रह-रह कर हिचकियाँ लेकर
साज़-ए-गम बार बार टूट गया
‘सैफ’ क्या चार दिन कि रंजिश से
इतनी मुद्दत का प्यार टूट गया
- सैफुद्दीन सैफ

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