बस इक झिझक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में
कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फसाने में
इसी में इश्क़ की क़िस्मत बदल भी सकती थी
जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में
- कैफ़ी आज़मी
Archive for May 25th, 2008
तेरा ज़िक्र
Posted in dreams, ख्वाब on May 25, 2008 | 3 Comments »











