रातों को चुपके से कोई साया आता है,
हवा का हर झोंका तेरी याद लाता है |
कब तक यूँ ही तपड़ता रहूँगा मैं,
क्यों हर बार मेरा मुक़द्दर मेरे दर से लौट जाता है ||
गौरव संगतानी
Archive for April 13th, 2008
मेरा मुक़द्दर….!
Posted in Blogroll, dreams, gaurav, ख्वाब on April 13, 2008 | Leave a Comment »











