काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता.
चाहत ये ना थी सब कुछ मिले, पर कभी कुछ तो मिला होता….
हर क़दम पे तेरे साथ चले थे हम,
किसी क़दम पे हमें भी इसका सिला मिला होता….
काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता.
अब हम थक गये हैं इस चाहत से, इस जीने से.
मर जाते अगर कफ़न में तेरा आँचल मिला होता….
काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता.
चाहत ये ना थी सब कुछ मिले, पर कभी कुछ तो मिला होता….
- गौरव संगतानी
Archive for September, 2007
काश कभी…..
Posted in Blogroll, dreams, gaurav, ख्वाब on September 22, 2007 | Leave a Comment »
सदियां….
Posted in ख्वाब on September 22, 2007 | Leave a Comment »
जिसकी आँखों में कटी थी सदियां,
उसने सदियों की जुदाई दी है…..
तेरी आवाज़ सुनाई दी है..
- गुलज़ार
धुआँ अभी बाक़ी है……….
Posted in dreams, gaurav, ख्वाब on September 2, 2007 | Leave a Comment »
बहुत पहले लिखा था ये शेर, आज फिर याद आ रहा है…..
आग बुझ गयी, पर धुआँ अभी बाक़ी है.
हम कहते हैं इश्क़ नहीं, पर नशा अभी बाक़ी है.
नशे का क्या है, ये तो उम्र भर रहेगा.
शुक्र है खुदा का, जान अभी बाक़ी है.
- गौरव संगतानी
सितारों से जगमगाते ख्वाब…..
Posted in dreams, ख्वाब on September 1, 2007 | Leave a Comment »
मोहब्बत पलकों पे कितने हसीं ख्वाब सजाती है..
फूलों से महकते ख्वाब..
सितारों से जगमगाते ख्वाब..
शबनम से बरसते ख्वाब..
फिर कभी यूँ भी होता है
की पलकों की डालियों से ख्वाबों के सारे परिंदे उड़ जाते हैं
और आँखें हैरान सी रह जाती हैं.
- जावेद अख़्तर
सुना है…….
Posted in dreams, gaurav, ख्वाब on September 1, 2007 | Leave a Comment »
सुना है वक़्त के पंख हुआ करते हैं….
कुछ लम्हों में हमने इसे ठहरे हुए देखा है.
किसी की ज़ुल्फ़ो में अटके हुए देखा है
झील सी आँखों में भटकते हुए देखा है…..
बहुत तेज़ी से निकल गया जब भी रोकना चाहा इसको,
सारी यादें साथ ले गया समेटना चाहा जिनको.
पर वो कुछ लम्हें आज भी वहीं ठहरें हैं,
आधी रातों [...]











